एक ऐसा शोर,एक ऐसी हलचल,
जो अंतरमन को झंकृत कर दे,
आँखों में नमी भर दे,
और स्मृति पटल पर पुनः उन धुँधली रेखाओं को,
निमंत्रण दे,
जिनकी परछायी में वेदनाओं व घावों का मरहम है।
वह होकर भी नहीं है,
और ना होकर भी है,
क्योंकि उसका होना ना होना तब तक मायने रखता है,
जब तक मै होता हूँ
और आज मै,मै नहीं हूँ,
नया रुप,नयी शक्ल,नये भाव,
शब्दों की फसलों से भरी जमी,
और शंकाओं के बादल से भरा आसमां
शायद आने वाला है कोई,
तभी तो मौन ने भी मुखरता दिखायी है,
हर शब्द में फिर जान आयी है।
और स्थिर,शांत विचारों के घर में,
हो रही है फिर,
शब्दों की चहलकदमी........
जिंदगी एक ऐसा फलसफा,
जहां है सुख और दुख की चहलकदमी,
ह्रदय एक ऐसा स्थान,
जहां है भावनाओं और संवेदनाओं की चहलकदमी,
मस्तिष्क है वो जीवंत स्थल,
जहां है विचारों की चहलकदमी,
और जब ये सारे मिल कर लेखनी से,
उकेरे जाये कोरे पन्नों पर,
तो बनती है,
शब्दों की चहलकदमी.............
और जब होती है ऐसी चहलकदमी,
तो क्रांति का सूत्रपात होता है,
नये युग के उस सूर्य की प्रतिमा,
स्थापित होती है,
जिसकी रौशनी में कोलाहल है,
जिसकी छवि में परिवर्तन का नया दौर है।
वह उस दुनिया के आसमां पर,
उगने वाला सूर्य है,
जहां शब्दों से ही स्थिरता व चंचलता को,
नियंत्रीत किया जाता है,
जहां पर शब्द ही लिखते है,
जीवन की कहानी,
और शब्द ही देते है क्षणभंगुर तन को,
गति की सार्थकता,
और वही गति परिभाषित करती है,
हजारों घोड़ों के दौडंते झुंड की,
चल शक्ति का,
सुनो धीरे से होने वाली है फिर,
पंक्तियों से एक शब्द की कमी,
क्योंकि सारे शब्द आज कर रहे है,
शब्दों की चहलकदमी............।