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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

'अभिनव राजस्थान अभियान'


Ashok Choudhary
नागौर जिले के मूंडवा क्षेत्र में अम्बुजा सीमेंट ने कमाल का खेल किया है. आज मैं कुछ कागजों का अध्ययन कर रहा था तो इस कंपनी की कई करतूतों का पता चला. साथ ही इस केस की स्टडी से प्रदेश की आई ए एस लॉबी, मीडिया, नेताओं और इन कंपनियों का नापाक गठजोड़ भी समझ आया है. किसानों से उनकी जमीन उद्योग लगाने, क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने आदि बहानों से लेकर रातों रात करोड़ों पर हाथ फेर देने की यह एक रोचक कहानी है. लंबी कहानी है और इस पर बड़ा खुलासा जल्द ही होने वाला है, पर अनियमितताओं की कुछ बानगियाँ देख लीजिए.
१. १९८८ में जब कंपनी को १००१ बीघा जमीन दी गई थी तो पहली शर्त यह थी कि अगर दो साल में उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो जमीन वापस ले ली जायेगी. लेकिन आज तक एक कट्टा सीमेंट का उत्पादन नहीं हुआ है. जबकि इस १००१ बीघा के अलावा किसानों से लोभ दे देकर और भी निजी जमीन खरीदने का काम चालू है. एक लैंड बैंक बनाई जा रही है, ताकि सीमेंट से भी ज्यादा पैसा जमीन के धंधे में कमाया जा सके. और कुछ सौदे कर भी लिए गए हैं. स्वीट्जरलैंड और फ्रांस के सौदागरों को पटा भी लिया गया है.
२. इस १००१ बीघा
 जमीन में गोचर भूमि भी शामिल है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है. एक नागौर कलेक्टर ने स्वयं अपने पत्र में यह बात स्वीकार भी की है. बाद में यही कलक्टर कंपनी को मदद करने में इसका एजेंट बनकर काम करने लगता है. गोचर भूमि में भी पटवारी को म्यूटेशन भरने के लिए दबाव से राजी करता है. आज कंपनी अखबारों में विज्ञापन देकर झूठ बोल रही है कि इसके पास कोई गोचर भूमि नहीं है ! 
३. लीज की मूल शर्तों को सरकार ने इतनी जल्दी बदला है, जैसे यहां पर कोई सरकारी कंपनी सीमेंट बनाने वाली हो. कंपनी का नाम बदलने में भी इतनी ही तेजी ! हम अपना नाम परिवर्तन कराने अगर कचहरी जायें तो कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं. लेकिन कंपनी की वकालत परदे के पीछे कई अफसरों व नेताओं ने की है.
४. मूल लीज में यह कहा गया था कि कंपनी किसानों और उनके परिवार के कल्याण के लिए कई काम करेगी, लेकिन कल्याण के लिए रकम देने में भी कंपनी ने गजब की कंजूसी दिखाई है. लेकिन यही क्यों, खारिया या गोटन में भी तो सीमेंट कंपनियों ने गांव वालों का क्या कल्याण किया है. केवल कुछ स्थानीय एजेंटों और मीडिया को खुश करके वहां भी सारी शर्तों की बातें दबा दी गई हैं.
१७ तारीख से खेण गांव के लोग अपनी गोचर को मुक्त करवाने के लिए आमरण अनशन शुरू करेंगे. इन गांव वालों ने इस बार काली दीवाली भी मनाई थी. गांव में कोई दीया नहीं जला, कोई पटाखा नहीं छोड़ा गया. 'अभिनव राजस्थान अभियान' के लोग मूंडवा, ईनाणा और खेंण गांव के लोगों की लड़ाई में उनके साथ रहेगा. कंपनी के काले-पीले कागजों को हम सोशल और माउथ मीडिया में जारी करेंगे, क्योंकि सामान्य मीडिया अपनी मजबूरियों में दबा है. सभी मित्र साथ दें.
                                                                                                     Ashok Choudhary
                                                                 Founder of abhinav rajasthan org

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

'अपना शासन'


एक आदमी अपने स्वार्थ के लिए कितनी जिंदगियां दांव पर लगा देता है. राजेंद्र राठौड ने दारा सिंह से अपनी दुश्मनी निकालने के लिए फर्जी मुठभेड़ के लिए कितने पुलिस वालों को यूज कर लिया. आज वे सभी जेल में पड़े हैं और उनके बीबी बच्चे परेशानियों से गुजर रहे हैं. एक आदमी की करतूत को कितने परिवार भुगत रहे हैं ? ऐसे ही कई पुलिस वाले अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद हैं, सोहराबुद्दीन केस में. इसी स्टाइल में एक मार्बल वाले को बचाने के लिए. माना कि ये पुलिस वाले भी जल्दी ही 'ऊपर' पहुंचना चाहते थे, पर कुदरती न्याय से 'अंदर' पहुँच गए !
और कमाल यह कि ऐसा व्यक्ति भाजपा की कोर समिति का सदस्य है. यही नहीं यह व्यक्ति उस वसुंधरा का खास है, जिसे भोले भाले राजस्थानी अपनी भाग्य विधाता माने बैठे हैं, केवल गहलोत से चिड के कारण. इससे बेखबर कि फिर वह शासन में आयेगी, फिर राजेंद्र, दिगंबर, भवानी सिंह जैसे व्यक्ति राज करेंगे. फिर गोपाल फोगावत, जगदीश गोदारा, सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापत जैसे लोग साजिशन या फर्जी मुठभेड़ों में मारे जायेंगे. फिर गुर्जरों की तरह किसी और कौम के लोग इनके झ
ांसे में आकर मरेंगे. या फिर कुछ किसान घडसाना या सोयला कांड की तरह पानी की मांग करते हुए शहीद होंगे.फिर ललित मोदी जैसे लोग रामबाग होटल से राजस्थान का राज चलाएंगे, राजस्थान का पैसा लूट कर ले जायेंगे. वही मोदी जो आज आई पी एल घोटाले में रेड कोर्नर नोटिस के कारण लन्दन में छुपा बैठा है. लन्दन , जहाँ वसुंधरा ने पिछले कुछ महीने गुजारे हैं.
मुझे आज वाकई में राजस्थान के गुलामी पसंद वाशिंदों पर दया आ गई. मैं बच रहा था कि ऐसे विषयों पर लिखने से बचूं, क्योंकि लोग वसुंधरा के अंधे भक्त बन गए हैं, झूठी बातों के बार बार दोहराए जाने के कारण. विनाश की देवी को विकास की देवी बताकर. मैं सोचता था कि नक्कारखाने में मेरी तूती की आवाज कौन सुनेगा. अपने रास्ते चलने की ठान ली थी, अकेले ही. लेकिन आज रहा नहीं गया. मित्रों हकीकत यही है. हनुमान बेनीवाल और किरोड़ी लाल मीना सच ही कह रहे हैं, पर कुछ लोग उन्हें कॉंग्रेसी एजेंट बताकर उनका मजाक उड़ा रहे हैं. पर शायद, जब तक लोग असलीयत समझेंगे, बहुत देर हो चुकेगी.
तो क्या करें ? क्या तीसरा मोर्चा सही विकल्प है ? नहीं , यह कोई सही विकल्प नहीं है. मोर्चा तो पहला ही बनना चाहिए. राजस्थान के विकास को समर्पित. घटिया राजनीति या कूटनीति से दूर. जागरूक नागरिकों के दम पर. स्वाभिमानी नागरिकों के दम पर. राजस्थान को हमने सुल्तानों, मुगलों, मराठों(सिंधियाओं) और अंग्रेजों के हाथों बहुत लुटवाया और बर्बाद करवाया है. अब और नहीं. 'अभिनव राजस्थान अभियान' से जुडिये. ३० दिसम्बर को नया इतिहास लिखना है. 'अपना शासन' स्थापित करना है. गहलोत की अक्षमता और वसुंधरा के व्यवसायीकरण से दूर.
@इस विषय पर कल और लिखूंगा. अब समय नष्ट करना ठीक नहीं है, वर्ना राजस्थान के कुशासन में डूबने के बाद केवल पछतावा रह जाएगा. उसी कुशासन में जिसे लोग प्रस्तुतीकरण के भ्रम में 'सुशासन' समझ बैठे थे. गहलोत से चिड जायज है, पर उसका एकमात्र हल कुँए में कूद जाना नहीं है. और भी रास्ते हैं जिन पर बात करेंगे. बस अपना संयम कायम रखियेगा.

writer abinav rajasthan abhiyan ke founder member h

मनमोहन कसाना - संपादक गुर्जर प्रवक्‍ता

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