स्‍वागत है आपका

आप आये लगा बहार आई है ऐसे ही आते रहना श्रीमान हमें खुशी होगी


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बुधवार, 26 दिसंबर 2012

तो फिर...........


तो फिर...........
फोटो - धीरेंन्‍द्र गुर्जर 
 मेरी आंखों में आंसू,
फिर भी लवों पे मुस्‍कान क्‍यूं है,
 जिन्‍दगी जीते हैं हम,
फिर भी हर कोई परेशान क्‍यों है,
 गुलशन है अगर सफर जिन्‍दगी का
तो फिर .............
इसकी मंजिल शमशान क्‍यूं है,
अगर जुदाई है प्‍यार का मतलब,
 तो फिर..............
 प्‍यार करने वाला हैरान क्‍यूं है
 अच्‍छा कर्म करना ही जिन्‍दगी है
 तो फिर........................
 बुराई का रास्‍ता इतना आसान क्‍यूं है,
 गर जिन्‍दगी है मरने के लिऐ
तो फिर ..............
जिन्‍दगी एक बरदान क्‍यूं है
 जो कभी ना मिले उससे ही लग जाता है दिल,
 तो फिर ................
दिल इतना नादान क्‍यूं है ा

             मनमोहन कसाना

रविवार, 28 अक्टूबर 2012


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फोटो और कविता मनमोहन कसाना
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मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

kuch nayi kavitae jo 23-10-2012 ko apni maati me aayi


http://www.apnimaati.com/2012/10/blog-post_1293.html


अभी मेहनत बाकी है.वर्तनी के अशुद्दियां > बहुत खलती है.फिलहाल यहाँ देखेइगा.













मनमोहन कसाना {अब तक कई किताबो में कहानी ,कविता , अनुवाद , प्रकाशित ।
अपनी माती वेब पत्रिका के अनुसार युवा है , जोशीले है ।}
सभी चित्र {डेला  और पत्ता} ब्लॉग से साभार 

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

जून 2009 के हिमप्रस्‍थ के अंक में छपी मेरी कविता

फोटो पतासी काकी से साभार


 **   टाईम पास कर गया वो ।  **

आज ही तो आया था वो ,
आज ही चला गया
रोते क्‍यों हो
क्‍या  कुछ ले  गया  वो
नहीं न लेने की बात  तो छोडो
वह तो मुझे गम की दुनिया में
ढकेल गया।
ऐसा नहीं है कुछ  भी
अरे जाने भी दो  रोते क्‍यों हो
ये तो सब कुछ उस अदभुत मदारी
का काम है
कुछ पल में ही खुशी की दंनिया को
मटियामेट कर गया वो।
अरे जाने भी दो ...............
लेने के बदले में
गम देकर
टाईम पास कर गया वो
फिर से दूसरी माया नगरी के
के माया जाल में फंसा गया वो
अरे छोडो न ................ अब
ज्‍यादा नहीं तो कुछ पल के लिए ही सही
टाईम पास कर गया वो ।।

                                  *मनमोहन कसाना*

मनमोहन कसाना - संपादक गुर्जर प्रवक्‍ता

आप सभी का तहे दिल से स्‍वागत है आप अपनी राय खुलके दें , मोबाईल नम्‍बरः - 09672 281 281 , 09214 281 281 और मेल आई डी है manmohan.kasana@gmail.com धन्‍यवाद